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दिल की एक साथ दो नसों का 70 मिमी तक ड्रील द्वारा सफल उपचार

दिल की एक साथ दो नसों का 70 मिमी तक ड्रील द्वारा सफल उपचार

78 वर्षके वृद्ध की हृदय की दो मुख्य नाडयों में 90 प्रतिशत तक के ब्लॉकेज को एक ही बार में रोटाब्लेशन प्रक्रिया द्वारा हटा रोगी की जान बचाई। यह सफल इलाज गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के कार्डियक सेंटर के विशेषज्ञों (कार्डियोलोजिस्ट) की टीम ने किया। इस प्रक्रिया के कारण रोगी को हृदयघात होने से बचाया जा सका। इस टीम में कार्डियोलोजिस्ट डॉ सीपी पुरोहित, डॉ हरीश सनाढ्य व डॉ रमेश पटेल शामिल थे। 
जिला पाली निवासी तुलसीदास कीकाराम (उम्र 78वर्ष) पिछले कई दिनों से सांस की तकलीफ, चलने-फिरने में अक्षम, रक्तचाप व शुगर की परेशानी से जूझ रहे थे। पूर्व में आ चुके दिल के दौरों से उनकी चिकित्सकीय हालात में कोई सुधार नहीं था। आपातकालीन स्थिति में उन्हें गीतांजली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां एंजियोग्राफी से हृदय की दो मुख्य नाडयों में ब्लॉकेज का पता चला। इस ब्लॉकेज का कारण दोनों नाडयों में कैलशयम का अत्यधिक मात्र में होना था। इसके बाद रोटाब्लेशन प्रक्रिया द्वारा इलाज करने का निर्णय लिया गया। आमतौर पर दो नाडयों में एक साथ रोटाब्लेशन काफी जटिल होने की वजह नहीं की जाती है। सामान्यतः इस ब्लॉकेज का इलाज बायपास सर्जरी द्वारा किया जाता है। पर सिद्धहस्त कार्डियोलोजिस्ट ने बिना एनेस्थिसिया एवं ओपन (बायपास) सर्जरी के दोनों नाडयों के ब्लॉकेज को साथ में हटाया। इस सफल प्रक्रिया में 2 घंटें का समय लगा। डॉ पटेल ने एक नाडी में लगभग 70 मिलीमीटर (7 सेंटीमीटर) तक रोटाब्लेशन किया जो केवल 30 मिलीमीटर तक ही प्रस्तावित है। इसमें नयी तकनीक इंट्रावेसक्यूलर अल्ट्रासाउंड का भी सहयोग लिया गया। ऐसे मामलों में धमनी के कभी-भी फट जाने का खतरा बना रहता है, पर कार्डियोलोजिस्ट की टीम ने पूर्वोपाय ही उसके सुधार के सारे इंतजाम कर रखे थे। परंतु ऐसी किसी प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और सफलतापूर्वक इलाज हो गया। सफल रोटाब्लेशन प्रक्रिया के बाद ही एंजियोप्लास्टी द्वारा तीन स्टेंट लगाकर इलाज संपन्न हुआ। रोगी अब पूर्णतः स्वस्थ है। रोगी का इलाज राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निःशुल्क हुआ। 
डॉ हरीश ने बताया कि आमतौर पर इस ब्लॉकेज का इलाज बायपास सर्जरी द्वारा किया जाता है परंतु गीतांजली हॉस्पिटल में उपलब्ध नवीनतम चिकित्सकीय सुविधाएं एवं सिद्धहस्त विशेषज्ञों की टीम द्वारा रोगी का इलाज सफल हो पाया। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया द्वारा इलाज के परिणाम बायपास सर्जरी के समान है। उन्होंने कहा कि कैलशयम का अत्यधिक मात्र में बढना अनुवांशक, खान-पान या अनियमित कारणों से होता है। डॉ पटेल ने दावा किया है कि दो नसों का एकसाथ रोटाब्लेशन एवं करीब 70 मिलीमीटर की रोटाब्लेशन दक्षिणी राजस्थान में गीतांजली हॉस्पिटल में पहली बार हुई है।
क्या होती है रोटब्लेशन प्रक्रिया?
रोटब्लेशन प्रक्रिया में बर्र (ड्रील मशीन) को हृदय की धमनी तक डाला जाता है जिसके प८चात् जमे हुए कैलशयम को हृदय में ही ड्रिल कर हटाया जाता है। यह प्रक्रिया स्टेंट को अग्रिम करने के उपयोग में लाई जाती है। डॉ पटेल ने बताया कि नई टेक्नोलोजी एवं अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित गीतांजली कार्डियोलोजी कैथलेब में इस प्रकार के जटिल ऑपरेशन भी सामान्य रुप से कम रिस्क में किए जाते है।