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जबलपुर से आए रोगी के सीने में जमे हुए पानी एवं जालो का मेडिकल थोरेकोस्कॉपी द्वारा हुआ सफल इलाज

जबलपुर से आए रोगी के सीने में जमे हुए पानी एवं जालो का मेडिकल थोरेकोस्कॉपी द्वारा हुआ सफल इलाज

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में मध्य प्रदेश- जबलपुर के रहने वाले 19 वर्षीय रोगी को सफल मेडिकल थोरेकोस्कॉपी कर स्वस्थ जीवन प्रदान किया गया। दो घंटे की इस प्रक्रिया में सीने में जमे हुए पानी एवं ऐडहेशन्स(जालो) को हटाया गया जिनका सामान्यतः इलाज ओपन सर्जरी द्वारा किया जाता है। इलाज करने वाली टीम में श्वास रोग विभाग के डॉ अतुल लुहाडिया व उनकी टीम में डॉ मोनिका बंसल ,डॉ त्रिशी नागदा ,डॉ अपूर्व गुप्ता एवं टेक्नीशियन लोकेंद्र व कमलेश शामिल थे ।

डॉ लुहाडिया ने बताया कि मरीज लंबे समय से खांसी ,सांस, बुखार ,सीने में दर्द से परेशान था। सीने में पानी भर गया था जिसे पहले दो से तीन बार निकाला भी गया था मगर स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। इसके बाद रोगी और उसके परिजन गीतांजली हॉस्पिटल में श्वास रोग विभाग में डॉक्टर अतुल लुहाडिया से मिले। एक्स-रे एवं सोनोग्राफी की जांच में पाया गया की सुई द्वारा पानी निकालने के बावजूद इंफेक्शन बढ़ गया एवं सीने में ऐडहेशन्स (जाले) बन गए थे जिसके कारण सुई द्वारा पानी नहीं निकल पा रहा था और जमने लग गया था| इसलिए थोरेकोस्कॉपी में विशेष प्रशिक्षित व अनुभवी डॉक्टर्स की टीम ने मेडिकल थोरेकोस्कॉपी (दूरबीन द्वारा इलाज) की और उन जालों को हटाया एवं जमे हुए पानी को सीने से निकाला और प्लुरा की बायोप्सी ली। बायोप्सी की जांच में पाया गया कि टी. बी.संक्रमण के कारण सीने में पानी जम गया था और जाले बन गये थे ।अभी रोगी नियमित दवा ले रहा है एवं स्वस्थ महसूस कर रहा है। रोगी के सीने में पानी भरना बंद हो गया है एवं फेफड़ा वापस सामान्य हो गया है ।

डॉ लुहाडिया ने बताया कि यदि किसी के सीने में दर्द , सांस में तकलीफ हो और सीने में बार-बार पानी भर रहा हो तो सुई से बार-बार पानी निकालने की बजाए उसे थोरेकोस्कॉपी जांच करवानी चाहिए ताकि जटिलताएं कम हो एवं समय पर उपचार हो सके व ओपन सर्जरी करवाने की जरूरत ही ना पड़े। उन्होंने बताया कि थोरेकोस्कॉपी एक प्रकार की सीने की एंडोस्कोपी है जिसमें सीने में छोटे से भाग को सुन्न करके एक छोटा सा छेद करके थोरेकोस्कोप सीने के अंदर डाला जाता है और सीने के अंदर क्या खराबी है उसको दूरबीन द्वारा देखा जाता है , सीने में जमे हुए पानी एवं जालो को निकाला जाता है और बायोप्सी ली जाती है । इसमें जटिलताएं , जोखिम , खर्चा कम होता है, रोगी को भर्ती कम दिन रहना पड़ता है और निशान भी कम रहता हैl इसके विपरीत सामान्यतः होने वाली ओपन सर्जरी में सीने में जिस तरफ भी बीमारी होती है उस तरफ की छाती के भाग को खोलकर ऑपरेशन करते हैं जिसमे जटिलताएं, खर्च, जोखिम ज्यादा होता है ।मरीज को पूरा बेहोश करना पड़ता है व सीने पर निशान भी ज्यादा रह जाता है। ओपन सर्जरी कार्डियो थोरेसिक सर्जन करते हैं लेकिन थोरेकोस्कॉपी द्वारा यह उपचार गीतांजली हॉस्पिटल के श्वास रोग चिकित्सको द्वारा संभव हो पाया। गीतांजली हॉस्पिटल में डॉ अतुल व उनकी टीम अब तक लगभग 500 मरीजों की सफल थोरेकोस्कॉपी कर निदान एवं इलाज कर चुकी है।

गीतांजली हॉस्पिटल का एक टर्शरी केयर मल्टी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल है यहाँ के श्वास रोग विभाग में सभी एडवांस तकनीके व संसाधन उपलब्ध हैं जिससे जटिल से जटिल समस्याओं का निवारण निरंतर रूप से किया जा रहा है।

गीतांजली हॉस्पिटल के पिछले 15 वर्षों से सतत रूप से हर प्रकार की उत्कृष्ट एवं विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है एवं जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाएं देता आया है।