उदयपुर (वि.)। गीतांजली मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, उदयपुर के आर्थोपेडिक विभाग में हेड एवं माइक्रोवैस्कुलर सर्जन डॉ. योगेश कुमार शर्मा, डॉ. मुकेश एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. भगवान ओटे व आईसीयू टीम ने एक जटिल माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी के माध्यम से 17 वर्षीय रोगी का पूरी तरह कटा हुआ अंगूठा सफलतापूर्वक जोड़कर उसका भविष्य बचा लिया। कोटड़ी (भीलवाड़ा) निवासी रोगी मोटरसाइकिल की चेन साफ कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसका अंगूठा चेन में फंस गया और पूरी तरह कटकर अलग हो गया। परिजन उसे पहले कोटड़ी के स्थानीय अस्पताल ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे रेफर कर दिया गया। इसके बाद भीलवाड़ा के एक निजी अस्पताल में टांके लगाने की सलाह दी गई। इसके बाद परिजनों ने अन्य निजी अस्पतालों में से संपर्क किया, जिन्होंने मरीज को तुरंत गीतांजली हॉस्पिटल, उदयपुर में रेफर किया। परिवार बिना देरी किए उदयपुर पहुंचा। गीतांजली हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉ. योगेश कुमार शर्मा ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल माइक्रोवैस्कुलर रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी का निर्णय लिया। समय रहते की गई इस जटिल सर्जरी के जरिए कटे हुए अंगूठे को सफलतापूर्वक री-इम्प्लांट कर दिया गया। डॉ. योगेश ने बताया कि इस तरह की चोटों में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि 5-6 घंटे के भीतर खून की सप्लाई दोबारा स्थापित कर दी जाए तो अंगुली या अंगूठा बचाया जा सकता है। सर्जरी के बाद रोगी का अंगूठा सुरक्षित है और हाथ की कार्यक्षमता बनी हुई है। समय पर इलाज नहीं मिलता तो उसे जीवनभर अंगूठे के बिना ही रहना पड़ता, जिससे दैनिक कार्यों में गंभीर समस्या आती। परिजनों ने गीतांजली हॉस्पिटल एवं डॉ. योगेश शर्मा व टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर लिए गए निर्णय और विशेषज्ञ इलाज से उनके बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो सका।