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गीतांजली अस्पताल ने कराया परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज

गीतांजली अस्पताल ने कराया परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज

गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर में शनिवार, १५.१२.२०१८ को गंभीर अवस्था में भर्ती रोगी मेहमूद खान उम्र ७७ वर्श निवासी जिला मंदसौर की गहन चिकित्सा ईकाई में मृत्यु पर परिजनों द्वारा अस्पताल प्रशासन को ब्लेक मेल करने एवं दबाव में लेकर फायदा प्राप्त करने हेतु अनाधिकृत रूप से हुडदंगबाजी करते हुए चिकित्सा कर्मियों को धमकाया, हाथा पाई करने का प्रयास किया, धक्का-मुक्की करी, गहन चिकित्सा ईकाई में जबरन प्रवेश किया एवं वहां हो हल्ला किया और अन्य गम्भीर मरीजों के जीवन को खतरा पैदा करना, अनाधिकृत विडियोग्राफी करना एवं अनुचित लाभ प्राप्त करने तथा अस्पताल की साख को नुकसान पहुंचाने की गरज से विडियो को सोशल साईट्स जैसे फेसबुक, वॉट्सअप, यूट्यूब पर डालना जिसके खिलाफ पुलिस ने आईपीसी की धारा १४३, ४५१, ३३६, ५०० व ५०४ के तहत मामला दर्ज किया। 
गीतांजली प्रशासन ने बताया कि रोगी को सब-एक्यूट इंटेस्टाईनल ऑब्सट्रेक्शन, उल्टियां, पेट के फूलने एवं कब्ज की शिकायत थी। इसके अलावा मरीज पूर्व से ही काफी लम्बे समय से धूम्रपान करने की वजह से फेफडों की दीवारें खराब होने से सांस लेने में परेषानी (क्रोनिक ऑब्सट्रेक्टिव पल्मोनरी डिसीज), हृदय रोग, गंभीर एसिडिटी की समस्या (गेस्ट्रोइसोफेसियल रिफ्लेक्स डिसीज) तथा उच्च रक्तचाप (हाईपर टेन्शन) से पीडत था। मरीज के परिजनों को रोगी की वस्तु स्थिति एवं ऑपरेशन के सभी सम्भावित खतरे बताकर उनकी सहमति से अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक उपचार आरम्भ कर दिया गया एवं जांचों के बाद ऑपरेशन (एक्सप्लोरेटरी लेप्रोटोमी) की सलाह दी गई एवं सहमति देने पर दिनांक १३/१२/२०१८ को मरीज का ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के पश्चात् मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने (इनएडिक्वेट रेस्पीरेशन) लगी जैसा कि पहले से चिकित्सकों द्वारा सम्भावना परीजनों को व्यक्त की जा चुकी थी जिसके चलते रोगी को वेन्टिलेटर पर एसआईसीयू (सर्जरी गहन चिकित्सा ईकाई) में शिफ्ट किया गया। मरीज की स्थिति के बारे में समय-समय पर मरीज के परीजनों को बताया गया। मरीज का ब्लड प्रेशर कम था जिसका आवश्यक ईलाज चल रहा था। मरीज की स्थिति काफी गंभीर थी जिसके बारे में चिकित्सकों ने परीजनों को अवगत करा दिया था। षनिवार को मरीज को कार्डियक पल्मोनरी अरेस्ट (हृदय की गति का अचानक बंद हो जाना) हुआ जिस पर मरीज को तुरंत जीवन रक्षक दवाएं दी गई तथा सीपीआर दिया गया। भरसक चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद मरीज रिवाईव नहीं हुआ तथा चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किया गया।