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गीतांजली में आत्मघाती बीमारी का रेडियोसर्जरी द्वारा सफल इलाज

गीतांजली मेडिकल काॅलेज एवं हाॅस्पिटल के कैंसर व न्यूरो विशेषज्ञों ने आत्मघाती बीमारी, ट्राइजेेमिनल न्यूरेल्जिया से पीड़ित 70 वर्षीय महिला रोगी का रेडियो सर्जरी द्वारा सफल उपचार किया। सफल इलाज करने वाले विशेषज्ञों की टीम में रेडिएशन आॅन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित एवं न्यूरोलोजिस्ट डाॅ विनोद मेहता शामिल थे।

सत्तर वर्षीया परताबी बाई पिछले चार सालों से चेहरे के दायीं ओर पर असहनीय दर्द से परेशान थी। खाना एवं पानी पीने में भी उन्हें काफी दिक्कत आ रही थी। इसी दर्द के चलते उनका गीतांजली हाॅस्पिटल के न्यूरोलोजिस्ट डाॅ विनोद मेहता द्वारा दवाईयों से इलाज चल रहा था। इस असहनीय दर्द की बीमारी को ट्राइजेेमिनल न्यूरेल्जिया कहते है। इस बीमारी का प्राथमिक उपचार दवाईयों द्वारा किया जाता है। पर रोगी के दर्द में कोई खास आराम न पड़ने पर उन्हें रेडिएशन आॅन्कोलोजिस्ट डाॅ रमेश पुरोहित के पास रेफर किया गया। डाॅ रमेश पुरोहित ने बताया कि इस बीमारी का उपचार दवाईयों, सर्जरी, मिनीमली इन्वेसिव तकनीक एवं रेडियोसर्जरी द्वारा संभव है। परंतु इस रोगी में दवाईयों द्वारा इलाज विफल हो चुका था और 70 वर्ष की आयु में सर्जरी काफी जोखिमपूर्ण थी। इसलिए रेडियोसर्जरी द्वारा इलाज करने का निर्णय लिया गया। इस सर्जरी में ट्राइजेमिनल नस के ऊपर एक सिंगल शाॅट में हाई डोज़ रेडिएशन दिया गया जिससे दर्द को कम किया जा सके। इसमें 2 घंटें का समय लगा। इस प्रक्रिया हेतु इलाज से दिमाग के बाकी हिस्सों को कोई नुकसान नहीं होता है एवं दर्द काफी कम हो जाता है। इस रोगी का इलाज राजस्थान सरकार की भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत निःशुल्क हुआ।

ट्राइजेेमिनल न्यूरेल्जिया क्या है ?

ट्राइजेेमिनल नस वह नस होती है, जो चेहरे से मस्तिष्क तक संवेदना पहुँचाती है। यदि इस नस में कोई खराबी हो जाए तो चेहरे के एक तरफ बहुत तीव्र दर्द होने लगता है जिसे ट्राइजेमिनल न्यूरल्जिया कहते है। यह एक ऐसी क्लिनिकल स्थिति है, जिसमें चेहरे के एक भाग में तीव्र कंपकंपी वाला दर्द महसूस होता है। इसमें रोगी को इतना दर्द होता है कि वह आत्महत्या कर लेते हैं या उन्हें आत्महत्या करना ही एकमात्र विकल्प लगता है।

रेडियोसर्जरी बेहतर विकल्प के साथ-साथ रामबाण भी..

डाॅ पुरोहित ने बताया कि ट्राइजेेमिनल न्यूरेल्जिया का शुरूआती इलाज तो दवाईयां है जो कि दर्द को कम करने में मदद करती है। फिर एक समय पर ऐसी स्थिति आ जाती है जहां दवाईयां भी असर करना छोड़ देती है, इस स्थिति को मेडिकल रिफ्रेक्ट्री कंडिशन कहते हैं, जिसके उपचार का एक विकल्प रेडियोसर्जरी होता है। जिन व्यक्तियों की क्लिनिकल स्थिति सही न हो (60 से ज़्यादा उम्र), उनके लिए रेडियोसर्जरी सबसे उचित एवं सटीक उपचार है।

रेडियोसर्जरी की कौनसी तकनीक उपचार में उपयोगी ?

इस बीमारी के उपचार में वर्तमान में सबसे नवीन न्यू-वर्सा एचडी मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक फ्रेमलेस एक्स-नाईफ रेडियोसर्जरी है जिसमें कोई चीर-फाड़ नहीं किया जाता, एनेस्थिसिया नहीं दिया जाता, किसी प्रकार का इंफेक्शन नहीं होता, इसमें भर्ती की आवश्यकता नहीं होती, जान का खतरा नहीं होता, कोई रक्तस्त्राव नहीं होता, रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है और यदि किसी व्यक्ति को हृदयाघात या फेंफड़ों की कोई बीमारी हो, तब भी इस सर्जरी को किया जा सकता है। रेडियोसर्जरी के तुरंत बाद ही दर्द में 50 प्रतिशत तक सुधार हो जाता है।